बजरंगबली की कृपा का अनुभव करें
श्री संकट मोचन मोचन हनुमान जी मंदिर, जो जमोली बॉर्डर के पास पुलिस चेक पोस्ट के निकट कुरेभार क्षेत्र में स्थित है, सुल्तानपुर जिले के ग्रामीण इलाके में एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र माना जाता है। यह मंदिर मुख्य रूप से भगवान हनुमान के संकट मोचन स्वरूप को समर्पित है और यहां आने वाले श्रद्धालु संकटों से मुक्ति, मनोकामनाओं की पूर्ति और बल-बुद्धि की प्राप्ति के लिए बजरंगबली के सामने सर झुकाते हैं।
कुरेभार कस्बा अयोध्या-प्रयागराज हाईवे के किनारे बसा हुआ है, जहां यह मंदिर डाकघर के आसपास या पुलिस चेक पोस्ट के करीब स्थित होने से यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए बहुत सुगम पहुंच वाला स्थान बन गया है।यह मंदिर लगभग 35 वर्ष पुराना है और इसके निर्माण में कुरेभार के व्यापारियों और स्थानीय लोगों का विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने मिलकर इसे आस्था का मजबूत केंद्र बनाया। मंदिर परिसर में हनुमान जी की मूर्ति मुख्य रूप से विराजमान है, जो देखने में ही भक्तों के मन को शांति और विश्वास प्रदान करती है। यहां अन्य देवी-देवताओं की छोटी प्रतिमाएं भी हैं, लेकिन मुख्य पूजा और आकर्षण तो पवनपुत्र हनुमान जी का ही है।मंगलवार और शनिवार को यहां श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ लगती है, क्योंकि ये दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं। सुबह-शाम नियमित आरती होती है, हनुमान चालीसा और अन्य भजन-कीर्तन का माहौल रहता है, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठता है।जमोली बॉर्डर और पुलिस चेक पोस्ट के पास होने के कारण यह जगह सुरक्षा की दृष्टि से भी सुरक्षित है और हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालक, यात्री तथा आसपास के गांवों के लोग आसानी से यहां पहुंचकर दर्शन कर लेते हैं। विशेष अवसरों जैसे हनुमान जयंती, रामनवमी, चैत्र नवरात्रि आदि पर यहां भव्य आयोजन होते हैं, जिसमें भंडारा लगता है और सैकड़ों लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।
स्थानीय मान्यताओं में इस मंदिर को सिद्ध पीठ के रूप में देखा जाता है, जहां कई भक्तों की ऐसी कहानियां प्रचलित हैं कि उन्होंने संकट में प्रार्थना की और उनकी समस्या का समाधान हो गया, जिससे मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई है।कुरेभार क्षेत्र में यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व का है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन चुका है, जहां लोग अपनी खुशियां बांटने और दुखों को साझा करने के लिए इकट्ठा होते हैं।
यदि आप सुल्तानपुर के इस भाग से गुजर रहे हों या कुरेभार आने का अवसर मिले तो यहां जरूर रुकें, क्योंकि यहां की शांत वातावरण, भक्ति की ध्वनि और बजरंगबली की कृपा का अनुभव वास्तव में हृदय को छू जाता है।
जय श्री राम, जय हनुमान।

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